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Champaran HumSafar Express : इन अजनबी सी राहों में, जो तू मेरा हमसफ़र हो जाये, बीत जाए पल भर में ये वक़्त, और हसीन सफ़र हो जाये. - Piyush Singh

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दिल्ली मेट्रो से जुड़े सूत्रों की मानें तो JICA फेज-4 के निर्माण कार्य में गति लाने के लिए फंड मुहैया कराने पर सहमत हो गया है। अनुदान पाने के लिए प्रक्रिया सरकारी स्तर पर है। इसमें थोड़ा समय लग सकता है।



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दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। आर्थिक दिक्कत से जूझ रहे दिल्ली मेट्रो रेल निगम (Delhi Metro Rail Corporation) के लिए राहत भरी खबर आ रही है। दिल्ली मेट्रो के चौथे फेज के निर्माण में तेजी लाने के लिए जापानी कंपनी जापान इंटरनेशनल कॉ-ऑपरेशन एजेंसी (Japan International Cooperation Agency) ने एक बार फिर मदद का हाथ बढ़ाया है। सूत्रों की मानें तो वह चौथे चरण के ट्रैक के निर्माण के लिए आर्थिक मदद देने के लिए तैयार हो गया है। इस बाबत जरूरी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि JICA से आर्थिक मदद मिलते ही दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के निर्माण कार्य में और तेजी आएगी। बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण के चलते 22 मार्च 2020 से अचानक बंद हुई दिल्ली मेट्रो फिर 7 सितंबर से शुरू हुई, लेकिन इस बीच उसे 1500 करोड़ रुपये के आसपास का घाटा हो गया। ऐसे में नए प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक दिक्कत आ रही थी।



आने वाले समय में धड़ाधड़ जारी होंगे टेंडर

दिल्ली मेट्रो से जुड़े सूत्रों की मानें तो JICA फेज-4 के निर्माण कार्य में गति लाने के लिए फंड मुहैया कराने पर सहमत हो गया है। इसी के साथ अनुदान पाने के लिए प्रक्रिया सरकारी स्तर पर है। इसमें थोड़ा समय लग सकता है। पैसा मिलते ही दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए धड़ाधड़ टेंडर जारी करेगा।



गौरतलब है कि दिल्ली मेट्रो को जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी आर्थिक मदद देता रहा है। यहां पर यह बता देना जरूरी है कि दिल्ली मेट्रो के प्रथम चरण की परियोजना के लिए परियोजना की कुल लागत का 58 फीसद ऋण जीका ने ही दिया था। इसी तरह दूसरे चरण की परियोजना के लिए कुल लागत का 49 फीसद और तीसरे चरण की परियोजना के लिए 42 फीसद लोन मुहैया कराया था। कुलमिलाकर तीनों फेज के लिए जीका द्वारा DMRC को मुहैया कराई गई रकम 13000 करोड़ रुपये के आसपास पहुंचती है। सूत्रोें की मानें तो मेट्रो के विस्तार के लिए जीका की फंडिंग बेहद जरूरी है वरना ट्रैक का निर्माण और चौथे चरण की मेट्रो निर्माण के काम में गति नहीं आ पाएगी।



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यहां पर बता दें कि चौथे चरण की मेट्रो विस्तार परियोजना में तीन कॉरिडोर के निर्माण में करीब 24 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें से जीका द्वारा 12 हजार 930 करोड़ रुपये ऋण के रूप में दिए जाने हैं। चौथे चरण की जिन तीन कॉरिडोर के लिए ऋण दिया जाना है, उनमें जनकपुरी से आरके आश्रम मार्ग, एरोसिटी से साकेत और मौजपुर से मजलिस पार्क तक है। इन तीनों कॉरिडोर की कुल लंबाई 61.67 किलोमीटर है। इसमें से 22.38 किलोमीटर भूमिगत और 39.30 किलोमीटर एलिवेटेड है। जीका द्वारा सिर्फ भूमिगत मेट्रो कॉरिडोर के लिए ही ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
बृहस्पतिवार रात 12 बजे से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकट मिलने लगा है। इसके साथ ही 19 स्टेशनों पर ये प्लेटफॉर्म टिकट मिलने लगेंगे। रेलवे का तर्क है कि स्टेशन पर लोगों की की भीड़ न बढ़े इसलिए ऐसा किया गया है।



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दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में कमी आने के बाद दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में ट्रेनों का संचालन सामान्य होने लगा है। स्पेशल ट्रेनों के बाद अब लोकल ट्रेनों भी दिल्ली-एनसीआर में चलनी शुरू हो गई हैं, वहीं लोगों को महंगाई का झटका भी लगा है। उत्तर रेलवे ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (New Delhi Railway Station) पर प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री करीब एक साल बाद दोबारा शुरू करने की इजाजत दे दी है। इसके बाद लोगों को प्लेटफॉर्म टिकट (के लिए 3 गुना कीमत चुकानी पड़ रही है। प्लेटफॉर्म की टिकटों में इजाफा करने के पीछे रेलवे का तर्क है कि स्टेशन पर लोगों की की भीड़ न बढ़े, इसलिए ऐसा किया गया है। वहीं, रेलवे का यह भी कहना है कि कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य मानकों का पालन कराया जाना जरूरी है। रेलवे द्वारा प्लेटफॉर्म की टिकटों में इजाफा करने के बाद लोग सोचसमझकर ही स्टेशन पर अपने परिचितों और रिश्तेदारों को छोड़ने आएंगे। 



बता दें कि बृहस्पतिवार रात 12 बजे से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकट मिलने लगा है। इसके साथ ही 19 स्टेशनों पर ये प्लेटफॉर्म टिकट मिलने लगेंगे। बता दें कि जो प्लेटफॉर्म टिकट 10 रुपये का था, वह अब 30 रुपये का हो गया है। 

वहीं, मध्य रेलवे ने भी कोरोना वायरस संक्रमण के चलते प्लेटफॉर्म पर अधिक भीड़ न हो इसलिए मुंबई मेट्रोपोलिटन क्षेत्र (एमएमआर) के कुछ अहम स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की इजाफा कर दिया है। मध्य रेलवे (सीआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार के मुताबिक, मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, दादर और लोकमान्य तिलक टर्मिनस तथा पास के ठाणे, कल्याण, पनवेल और भिवंडी में अब प्लेटफॉर्म टिकट 10 रुपये के बजाय 50 रुपये में मिलेगा। कुलमिलाकर प्लेटफॉर्म के टिकट में 5 गुना इजाफा किया गया है। संबंधित अधिकारी की मानें तो नई दर एक मार्च से प्रभाव में आ गई और यह इस साल 15 जून तक प्रभावी रहेगी। वहीं, पैसेंजर ट्रेनों का संचालन भी टिकट के बढ़े दामों के साथ किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में राम की नगरी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ साथ वहां का कायाकल्प भी हो रहा है। इस बीच उत्तर रेलवे के जीएम आशुतोष गंगल ने कहा कि, जल्द ही फैजाबाद रेलवे स्टेशन का नाम अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन रखा जाएगा। नाम बदलने को लेकर फैजाबाद के सांसद लल्लू सिंह के द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की गई थी।
उत्तर रेलवे के जीएम आशुतोष गंगल ने जानकारी देते हुए बताया कि, अयोध्या में फेज एक और फेज दो दोनों का कार्य होना है। फेज एक का कार्य काफी आगे चल रहा है। जीएम उत्तर रेलव ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली आरपीएफ कॉन्स्टेबल विनीता कुमारी समेत रेलवे के अन्य कर्मचारियों/अधिकारियों को भी सम्मानित किया।
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गंगल ने कहा कि राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों से वार्ता हुई थी। यूपी सरकार ने भूमि के लिए आश्वस्त कर दिया गया है कि, फेज 2 के लिए पहला फेज पूरा करने का टारगेट जून तक है। फेज 2 के लिए रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव दे दिया है। उस पर भी कार्य कर रहे हैं। फैजाबाद में भी मन्दिर निर्माण के बाद का कॉन्सेप्ट डेवलप कर लिया है।
पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने भेजा था नाम बदलने का प्रस्ताव
रेलवे के अनुसार सेक्शन का निरीक्षण किया है, स्पीड ट्रायल किया है।100 किमी से ऊपर की स्पीड का अच्छी राइड मिली है। वहीं डबलिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन मुख्य है जो कि, दिसम्बर 2023 तक जौनपुर का पूरा होगा। अयोध्या में पहले फेज में 15 हजार के आसपास तो वहीं फेज 2 में एक लाख का तीर्थ यात्रियों का फुटफॉल बड़े धार्मिक कार्यों के लिए तैयार किया जा रहा हैं।
कहा कि, फैजाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलने को राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। नाम बदलने को लेकर अयोध्या के सांसद लल्लू का सुझाव था। राज्य सरकार की अनुमति मिलते ही नाम बदला जाएगा। अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन नाम रखने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि अयोध्या से सटे जिला दरियाबाद बाराबंकी पर ट्रायल, फेज 2 में स्टेशन पर सुविधाएं बढ़ाने का प्रस्ताव है।

24 Public Posts - Sat Feb 27, 2021

6 Public Posts - Sun Feb 28, 2021

Feb 28 (23:32)
CircarExpress
TheMadrasMail^~   6209 blog posts
Re# 4890046-31            Tags   Past Edits
The more accurate thing to say is that Indraprastha was located roughly in the same location as Delhi today. But the modern day Delhi is completely unrelated to the ancient Indraprastha or Hastinapur. The city was destroyed or abandoned multiple times in history, with many different rulers building and naming their own cities in roughly the same area. Indraprastha was also a pre-historic name and wasn't in use by an medieval rulers.

The modern day Delhi has been continuously in occupation since the 1200's.
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Delhi is a brand new city that was completely built from scratch (like Navi Mumbai and Chandigarh) starting from 1911 when the capital of India was moved there from Calcutta.

11476 views
Feb 28 (23:34)
Rohit Kumar
RohitBiharSharif~   252 blog posts
Re# 4890046-32            Tags   Past Edits
Yes, the name Dilli exists since the time of Tomars, way before the advent of Delhi Sultanate.

11058 views
Feb 28 (23:58)
🚩 जय फरकिया 🚩
KhagariaJn^~   46384 blog posts
Re# 4890046-33            Tags   Past Edits
Delhi & New Delhi Just 2 Km hai.
😍
Lekin dono ka alag rutwa hai🤔

6365 views
Mar 01 (10:14)
Believe in You
akhileshchauras~   3131 blog posts
Re# 4890046-36            Tags   Past Edits
After UP....MP is on the same track to restore the names of historic cities..like "Hoshangabad to Narmadaouram" and many others

1880 views
Mar 02 (17:59)
chandrasekar2009
Funwithtrain~   189 blog posts
Re# 4890046-37            Tags   Past Edits
I have never agreed with Madras turning Chennai. I still prefer Madras for Chennai. Govt here made this change on seeing other cities doing that. Chennapatnam was named by Damarla Venkatadri Nayaka in honour of his father, Damarla Chennappa Nayakudu from which Chennai came. I always believe that cities should retain old name, to change name is like changing your roots. The name change tamasha is only going in india. London, Rome have existed for past 2000+ years why were they not renamed?
रांची, जेएनएन। इंडियन रेलवे (Indian Railways) की ओर से बड़ी खबर (Railway News) आ रही है। ट्रेन यात्रियों (Indian Railway Passengers) की यात्रा को सुखद और शानदार बनाने के लिए भारतीय रेल (Railway) जल्‍द ही एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी में जुटा है। रेलवे की ओर से की जा रही प्‍लानिंग पर गौर करें तो इस साल सामान्‍य श्रेणी की टिकट (General Ticket) पर जनरल डिब्‍बों में सफर (Rail Journey) करने वाले यात्री भी एसी का आनंद ले सकेंगे। इसके साथ ही गंतव्‍य तक पहुंचाने वाली एक्‍सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों की स्‍पीड भी 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ाई जा रही है। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक इस साल के अंत तक भारतीय रेल एयर कंडीशन वाला जनरल डिब्‍बा, सेकेंड क्‍लास कोच (AC General Second Class Coach) लांच कर देगा। इसके अलावा भी रेलवे कई नए बदलाव करने जा रहा है। जो यात्री सुविधाओं के लिहाज से हमारी...
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यात्रा अनुभवों को और बेहतर बनाएगा।
भारतीय रेल ने कोरोना संकटकाल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए, हर तरीके से देश को इस चुनौती से हुए बाहर निकालने में अपनी संपूर्ण शक्ति और सामर्थ्य से योगदान दिया है। भारतीय रेल, देश की सेवा के लिये सदैव समर्पित हैं, प्रतिबद्ध हैं, संकल्पित हैं। pic.twitter.com/5eTldj9qZI— Ministry of Railways (@RailMinIndia) March 4, 2021
बता दें कि रेलवे ने इससे पहले इकोनॉमी एसी 3 टीयर कोच लांच किए हैं। अब साल के अंत तक एयर कंडीशन वाला जनरल सेकेंड क्‍लास कोच (AC General Second Class Coach) भी पटरियों पर उतर आएगा। इससे आम आदमी को रेल यात्रा के दौरान सुकून का अनुभव होगा। बताया गया है कि नए एसी जनरल कोच (General Second Class Coach) कपूरथला रेल कोच फैक्‍ट्री में बनाए जा रहे हैं। रेलवे साल के अंत तक अनारक्षित जनरल डिब्‍बों को एयर कंडीशन बनाने की तैयारी में जोर-शोर से जुटा है।
कपूरथला के रेल कोच फैक्‍ट्री के मैनेजर आर गुप्‍ता के मुताबिक रेलवे का यह प्रोजेक्‍ट भारत में रेल यात्रा के अनुभवों को पूरी तरह बदल कर रख देगा। आम आदमी के लिए रेलवे में एसी कोच लग जाने के बाद सेकेंड क्‍लास जर्नी भी सुखद हो जाएगी। गर्मियों में लोग राहत का अनुभव करेंगे। उनकी यात्रा पहले के मुकाबले काफी आरामदायक हो जाएगी। इससे पहले वर्ष 2016 में सेकेंड क्‍लास जर्नी के लिए रेलवे ने दीन दयालु कोच पटरियों पर उतारे थे। उनमें लगेज रैक, पैडेड सीट से लेकर मोबाइल चार्जिंग प्‍वाइंट आदि सुविधाएं दी गई थीं।
रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला के जनरल मैनेजर रविंदर गुप्ता ने बताया कि जनरल सेकेंड क्लास एयर कंडीशन कोच का डिजाइन फाइनल कर लिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2021 के अंत तक एसी जनरल कोच पटरी पर उतर आएंगे। बताया कि अभी जरनल सेकेंड क्लास कोच में एक साथ 100 यात्री बैठ सकते हैं, जिसकी लागत दो करोड़ रुपये से अधिक आती है। नए एयर कंडीशन जनरल सेकेंड क्लास कोच में इससे भी पहले के मुकाबले अधिक क्षमता के साथ यात्री बैठ सकेंगे। इस तरह के कोच में यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं भी उपलब्‍ध होंगी।  रेल कोच फैक्‍ट्री, कपूरथला की ओर से बताया गया है कि नए एसी जनरल कोच शुरू में लंबी दूरी के मेल, एक्‍सप्रेस ट्रेनों में लगाए जाएंगे। ये ट्रेनें सामान्‍यत: 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्‍पीड से चलने में सक्षम होंगे। अीाी जनरल क्‍लास में लगे नॉन-एसी साधारण कोच 110 किमी प्रति घंटे की स्पीड से ज्‍यादा तेज नहीं चल सकते हैं। रेलवे आने वाले दिनों में अधिकतर ट्रेनों की स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटा करने की तैयारी में है। ऐसे में जनरल डिब्‍बे, सेकेंड क्‍लास कोच में जरूरी बदलाव किया जा रहा है।
रेलवे की इस वृहत प्‍लानिंग के तहत तमाम स्लीपर और जनरल कोच काे एयरकंडीशन कोच से बदला जा रहा है। इससे पहले रेल कोच फैक्ट्री ने मेल-एक्‍सप्रेस ट्रेनों के लिए इकनॉमी एसी 3-टीयर कोच लांच किए हैं। इसे सभी ट्रेनों में स्‍लीपर क्‍लास की जगह पर लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इकनॉमी एसी कोच अधिकतम 180 किमी प्रति घंटे की स्पीड तक चल सकते हैं। अगले साल तक रेलवे ऐसे 248 इकनॉमी एसी कोच बनाने जा रहा है।
अब जहां हर काम दोबारा सामान्य हो रहा है वहीं प्लेटफार्म टिकट की सुविधा को भी फिर से बहाल किया गया है लेकिन एहतियात के साथ। यह सुविधा कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण एक साल पहले पूरी तरह बंद कर दी गई थी।



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नई दिल्ली, एएनआइ। दुनिया भर में जारी कोविड-19 महामारी के बीच रेलवे मंत्रालय ने प्लेटफार्म के टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। मंत्रालय का कहना है कि यह अस्थायी फैसला है जो यात्रियों की सुरक्षा और स्टेशनों पर अधिक भीड़ के जमा होने से रोकने के लिए लिया गया है। इस फैसले के बाद जिस प्लेटफार्म टिकट की कीमत 10 रुपये थी अब 30 रुपये हो गई।

DRMs की है स्टेशनों पर भीड़ के प्रबंंधन की जिम्मेदारी

इस ऐलान के साथ मंत्रालय ने बताया कि स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित करना डिविजनल रेलवे मैनेजरों (DRMs) की जिम्मेदारी है। साथ ही कहा, 'यह अस्थायी फैसला है और यात्रियों के हित में रेलवे प्रशासन द्वारा लिया गया है ताकि स्टेशनों पर जो भीड़ होती है उसे रोका जा सके।' मंत्रालय ने बताया, 'स्टेशन पर अधिक लोगों के आने से भीड़ हो जाती है और इसे रोकने के लिए समय समय पर प्लेटफार्म टिकट के शुल्क को बढ़ाया जाता है। यह अधिकार उक्त स्टेशन के  DRMs कर है।' इस तरह के फैसले कई सालों से हालात के मद्देनजर लिए जाते रहे हैं। इसमें नया कुछ नहीं है।  इससे पहले रेलवे ने कम दूरी तय करने वाली ट्रेनों की टिकट की भी कीमतों में बढ़ोतरी की थी  ताकि गैरजरूरी सफर को रोका जा सके। 



महामारी के कारण प्लेटफार्म टिकट की बिक्री पर लगी थी रोक

बता दें कि बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए एक साल पहले प्लेटफार्म टिकट की सुविधा को बंद किया गया था। इससे केवल यात्रा करने वाले ही स्टेशन पर आ सकते थे और भीड़ जमा होने पर रोक थी। लेकिन अब जहां हर काम दोबारा सामान्य हो रहा है वहीं इस सुविधा को भी फिर से बहाल किया गया है लेकिन एहतियात के साथ। पिछले साल यानि 2020 में लॉकडाउन से पहले भीड़ को रोकने के लिए 18 से 22 मार्च के बीच इसकी कीमत बढ़ाकर 50 रुपये किए गए थे। इसके बाद प्लेटफार्म पर भीड़ में कमी हुई थी जिन्हें यात्रा करनी होती थी उनके साथ कामी कम लोग आते थे।
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